
एक पंख लगा दो मुझको माँ,
जो ऊँचे नभ में उड़ पाऊं मैं,
दूर जहाँ से आना चाहूँ,
बस तेरे पास पहुँच पाऊं मैं!
ना गिरने का डर होगा फिर मुझको,
बादल से भी ऊँचा उड़ पाऊं मैं,
जितना भी ऊँचा मैं चाहूँ,
माँ उतना ऊँचा उड़ जाऊं मैं!
एक पंख लगा दो मुझको माँ,
फिर खुले गगन में खुलकर,
चाँद सूरज से भी ऊँचा उड़ पाऊं मैं,
बस एक आज़ाद पंछी बन कर उड़ता ही चला जाऊं मैं!
थके ना कभी मेरे पर उड़ कर,
माँ बस इतना ही चाहूँ मैं,
पंख विशाल हो बस माँ इतना,
की तुम्हे भी साथ ले उड़ पाऊं मैं!
बस एक पंख लगा दो मुझको माँ,
अब उड़ना ही चाहूँ मैं,
थक चूका हूँ धरा पर बैठा,
आशमान की शैर कर आऊं मैं!
बस अब पंख लगा दो मुझको माँ, अब उड़ना ही चाहूँ मैं!!
अमित~~